बीच
मझदार मेरी
कश्ती,
नही
मिल रहा
किनारा,
हर
और फैली
अमर बेल,
खड़ा
हूँ बेसहारा,
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सब
से सुना
है
ये
दुनिया अच्छी
नहीं,
ताउम्र
घुमा जहाँ
पर
मुझे बुरा
कोई मिला
नही।
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हमें
प्यार के
काबिल समझा
ये हैं
उनका करम
।
हम
हो चुके
हैं जिनके,
अब
वो ही
हैं हमारा
धरम ।
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