Sunday, November 30, 2014

लघु कथा- दंगा



दंगा

उसे किसी जरुरी काम से दुसरे शहर जाना था | पर एन वक़्त पर उसने पाया उसकी मोटर साइकिल ख़राब है, उसने अपने दोस्त से जो की दुसरे धर्म को मानने वाला था  उसकी बाइक उधार ली और चल पड़ा ।
शहर पहुंच कर पता लगा उस शहर में धर्म के ठेकेदार एक दुसरे के खून के प्यासे हो रहे थे ।
उसकी बाइक को कुछ दंगइयो ने चारो तरफ से घेर लिया बता तेरा धर्म क्या है जल्दी बता वर्ना तेरा काम तमाम करता हूँ ।
वो डर गया मैं मैं उसके मुह से दो शब्द ही निकले थे, की उनमे से एक चिलाया अरे ये तो अपना ही भाई है, इसकी बाइक पे ये निशान देखो।
चल भाई तु जल्दी निकल|
उसके दोस्त की बाइक पर बने उस धार्मिक निशान ने उसे बचा लिया।
वो सोचने लगा किसे धन्यवाद दू दोस्त को या उसके धर्म को

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