संत
कुछ
समय से
हमारे समाज
में एक
नया ट्रेंड
चला है।अध्यात्मिक
गुरु बनाने
का और
इस ट्रेंड
ने मार्किट
में छद्म
रूप धरे
संतों की
संख्या में
यकायक वृधि
कर दी
।
ये
कथित संत
AC गाड़ियों में
घुमते है
आलिशान मकानों
में रहते
है यदि
इनकी सम्पति
का सही
सही अनुमान
लगाया जाये
तो अम्बानी
जैसे घरानों
को अपने
आप पर
अफ़सोस होगा
की उन्होंने
गलत बिजनस
चुन लिया
।
और
इनके भक्तो
के तो
कहने ही
क्या ये
तो बलात्कारी
बाबाओ को
भी भगवन
मानते है
उनके लिए
आरतिया गाते
है भगवान
की जगह
अपने इन
कुकर्मियों को
पूजते है।
एक
बात समझ
में नहीं
आती, इतनी सुख
समर्धि में
रहने वाला
संत कैसे
हो सकता
है ये
भेड़ की
खाल में
बैठे भेडिये
धीरे धीरे
हमारी सम्पति
को हड़प
कर अपने
घर बना
रहे है
और नाम
दे रखा
है ट्रस्ट
का असल
में सब
उनके ही
पेट में
जा रहा
है इन
लोगो की
वज़ह से
ही हमारे
धरम पर
आज दुनिया
सवाल उठा
रही है।
No comments:
Post a Comment