जीव दया
मंदिर में सत्संग जोरो पर था |विषय था जीवों पर दया,स्वामी जी के वचन सभी को मन्त्र मुग्ध कर रहे थे|जानकी देवी भक्ति रस से सराबोर थी |कितना सच कह रहे है न स्वामी जी सभी जीव एक सामन ही तो होते है, जानकी देवी ने अपने पास बैठी महिला को अपने दर्शन ज्ञान से अवगत कराया |तभी एक छोटा सा लड़का भागता हुआ जानकी देवी के पास आया उनके कान में कुछ कहा और जानकी देवी तेजी से अपने घर की और दौड़ी |वहाँ एक छोटा सा आवारा पशु जानकी देवी के पालतू जानवरों का चारा खा रहा था |
जानकी देवी ने पास ही पड़ा डंडा उठाया और उस छोटे से जानवर को उसके दुसाहस का फल दे दिया| थोड़े से चारे की कीमत उस बेजुबान को अपनी एक टांग देकर चुकानी पड़ी वो सड़क पे पड़ा दर्द से रेकने लगा| जानकी देवी जल्दी जल्दी हाथ धोकर मंदिर और जाने लगी उन्हें डर था की कंही सत्संग निकल न जाये|मंदिर से आवाज़ आ रही थी की सभी जीवों में ईश्वर का वास होता है हमे सभी से........
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