लघु कथा - प्रचार
प्रचार
चुनाव प्रचार जोरों
पर है आज नेता जी का शहर कीसबसे गरीब बस्ती में दौरा है |
किसी ने नेता जी को सलाह दी की यदि वो
किसी गरीब के घर भोजन करे तो काफी पब्लिसिटी मिल सकती है |
जल्दी जल्दी में एक गरीब बुढिया का घर
चुना गया जो अपने दो साल के पोते के साथ रहती थी मंत्री जी समर्थको के उसकी झोपडी
में घुसे “
अम्मा खाना खिलाओगी
क्या बहुत भूख लगी है”
बुढिया ने जो थोड़े से
चावल बनाये थे वो नेता जी कि भेट चढ़ गएऔर समर्थको के वजन से उसकी एक मात्र चारपाई
टूट गयी
झोपडी के बाहर नेताजी की जय जय कर के नारे लग
रही थी और अंदर बुढिया सोच रही थी की आज उसके पोते को जमींन पर सोना पड़ेगा और
उसे भूखे पेट
No comments:
Post a Comment